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time:2021-10-18 15:30:49 बेटी की उम्र 8 साल है, सुकन्या समृद्धि और पीपीएफ में से किसमें निवेश करना फायदेमंद? Views:4591

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सुकन्‍या समृद्धि योजना बेटियों के लिए सरकार की लोकप्रिय स्‍कीम है.
कविता मानती हैं कि निवेश का फैसला काफी जांच-परख के बाद ही करना चाहिए. इसके लिए सभी उपलब्ध विकल्पों की समीक्षा जरूरी है. लिहाजा, 8 साल की बेटी के लिए निवेश शुरू करने से पहले वह निवेश के रिटर्न, ब्‍याज दर, जोखिम, समयावधि जैसी बातों का ख्‍याल रखना चाहती हैं. पूंजी बढ़ाने के लिए सुकन्या समृद्धि योजना (एसएसवाई) और पब्लिक प्रोविडेंट फंड (पीपीएफ) को सबसे सुरक्षित निवेश विकल्प माना जाता है. कविता इन दोनों विकल्पों की तुलना करना चाहती हैं. उन्हें पता है कि दोनों पर सेक्शन 80सी के तहत 1.5 लाख रुपये तक टैक्‍स बेनिफिट उपलब्‍ध है. हालांकि, एसएसवाई पर ब्‍याज दर पीपीएफ की तुलना में अमूमन 0.5 फीसदी ज्यादा होती है. वह सोच में पड़ी हैं कि क्‍या एसएसवाई बेहतर विकल्प है.

सुकन्‍या समृद्धि योजना बेटियों के लिए सरकार की लोकप्रिय स्‍कीम है. इस स्‍कीम में बेटी के जन्‍म के बाद उसके नाम पर खाता खुलवाया जा सकता है. उसके 10 साल का होने तक ऐसा किया जा सकता है. खाता खुलने के बाद से बेटी के 21 साल का पूरा होने पर अकाउंट मैच्‍योर होता है. मैच्‍योरिटी तक ब्‍याज अर्जित करने के लिए खाता खुलने की तारीख से कविता को बेटी के 15 साल का होने तक हर साल न्‍यूनतम निवेश करने की जरूरत पड़ेगी. लेकिन, एसएसवाई में उनका पूरा पैसो बेटी के 18 साल का होने तक लॉक रहेगा. सच तो यह है कि बेटी के 18 साल का होने के बाद भी कविता निवेश का सिर्फ 50 फीसदी ही निकाल पाएंगी. बाकी की रकम वह तभी निकाल पाएंगी जब वह 21 साल की होगी.

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सुकन्‍या समृद्धि योजना में अक्‍सर ब्‍याज की दर ज्‍यादा होती है. इसका कारण है कि यह स्‍कीम कविता जैसे माता-पिता को बेटी के भविष्‍य के लिए पैसा जुटाने को प्रोत्‍साहित करने के लिए है. हालांकि, डिपॉजिट बेटी के 15 साल का होने तक किया जा सकता है. 16वें साल से 21वें साल के बीच किसी डिपॉजिट की अनुमति नहीं है. हालांकि, अकाउंट पर ब्‍याज 21 साल तक मिलना जारी रहता है. लिहाजा, पैसे को लॉक होने के बावजूद 15 साल से आगे निवेश पर बंदिश है. यह पूंजी के जुटने की क्षमता पर रोक लगाता है.

दूसरी ओर पीपीएफ कविता को निवेश की अवधि पर बंदिशों के बगैर टैक्‍स-फ्री इंटरेस्‍ट अर्जित करने की सहूलियत देता है. इसमें लॉक-इन अवधि छोटी है और लंबी अवधि तक निवेश किया जा सकता है. पीपीएफ के ये फीचर कंपाउंडिंग अवधि के मामले में एसएसवाई जैसे ब्‍याज देने वाले प्रोडक्‍टों के फायदे को न्‍यूट्रलाइज करते हैं.

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लिहाजा, कविता के निवेश का फैसला ज्‍यादा ब्‍याज दर से ही प्रभावित नहीं होना चाहिए. उनके पास सुकन्‍या समृद्धि में निवेश के लिए अपेक्षाकृत कम समय (7 साल) है. यह शायद उन्‍हें कंपाउंडिंग का उतना ज्‍यादा फायदा न लेने दे. कविता की बेटी की उम्र अगर और कम होती तो एसएसवाई वाकई शानदार विकल्‍प था. यह उन्‍हें स्‍कीम में निवेश के लिए ज्‍यादा समय देता. उस स्थिति में वह पीपीएफ की तुलना में ज्‍यादा पैसा जुटा पातीं.

इस पेज की सामग्री सेंटर फॉर इंवेस्टमेंट एजुकेशन एंड लर्निंग (सीआईईएल) के सौजन्य से. गिरिजा गादरे, आरती भार्गव और लब्धि मेहता का योगदान.

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(Disclaimer: The opinions expressed in this column are that of the writer. The facts and opinions expressed here do not reflect the views of www.economictimes.com.)

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